मंगलवार, 19 अक्टूबर 2021

राजस्थानी लोकगीत

लोकगीत

 कालयो कूद पड्यो मेले में

साईकल पंक्चर कर ल्यायो ||

दो दिन ढब जा रे डोकरिया

छोरी म्हारी बाजारियों काढ़े ||

आए बाज बाज राय डूंगर में

छोरी तने लेबलो आयो ||

जयपुर जाजे कब्जो ल्याजे

कब्जो लाल बूटी को ||

छोरी चटक मटक मत चाले

कमर में लचको पड़ जागो ||

जल्दी सीजे रे दर्दीका

छोरी म्हारी सासरिये जा सी ||

काजल टिकी के नखरे में

छोरी म्हारी मार मत जाजे रे ||

छोरी छपरे में लुक जय रे

तन्नेे लेवनियो आयो ||

कालयोकूद पड्यो मेले में

साईकल पंक्चर कर ल्यायो ||

गुरुवार, 5 अगस्त 2021

देशभक्ति गीत

 देशगान


उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती...देशभक्ति गीत

 

उठो जवान देश की वसुंधरा पुकारती 


देश है पुकारता पुकारती माँ भारती


रगों में तेरे बह रहा है खून राम श्याम का 


जगत गुरु गोविन्द और राजपूत शान का 


तू चल पड़ा तो चल पड़ेगी 


साथ तेरे भारती 



सोये कर धरा को फोड़ आसमा की कालिमा 


जगा दे सुप्रभात को फैलादे अपनी लालिमाँ 


तेरी शुभ्र कीर्ति विश्व संकटों को तारती 


उठा खड़ग बढ़ा कदम कदम बढ़ाए जा 


कदम कदम पे दुश्मनों के धड़ से सर उड़ाए जा 


उठेगा विश्व हाँथ जोड़ के तेरी आरती 


देश है पुकारता पुकारती माँ भारती 



हे शत्रु धन धना रहा चहुँ दिशा में देश की 


पता बता रही हमें किरण किरण दिनेश की 


वो चक्रवर्ती विश्व विजय मातृभूमि निहारती


देश है पुकारता पुकारती मां भारती।। 

बुधवार, 4 अगस्त 2021

                      सरस्वती वंदना

हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां

तु स्वर की देवी है संगीत तुझसे, हर शब्द तेरा है हर गीत तुझसे,

हम है अकेले, हम है अधुरे, तेरी शरण हम,हमे प्यार दे मां











हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां

मुनीओं ने समझी, गुणीओं ने जानी, वेदों की भाषा, पुराणों की बानी,

हम भी तो समझें, हम भी तो जानें,विद्या का हमको अधिकार दे मां

हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां

तु श्वेतवरणी, कमल पे बिराजे, हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे,

मन से हमारे मिटा दे अंधेरे,हमको उजालों का सॆसार दे मां

हे शारदे मां, हे शारदे मां अज्ञानता से हमें तार दे मां

सरस्वती वन्दना

 सरस्वती वंदना

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

जग सिरमौर बनाएं भारत,

वह बल विक्रम दे। वह बल विक्रम दे॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

साहस शील हृदय में भर दे,

जीवन त्याग-तपोमर कर दे,

संयम सत्य स्नेह का वर दे,

स्वाभिमान भर दे। स्वाभिमान भर दे॥1॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥

लव, कुश, ध्रुव, प्रहलाद बनें हम

मानवता का त्रास हरें हम,

सीता, सावित्री, दुर्गा मां,

फिर घर-घर भर दे। फिर घर-घर भर दे॥2॥

हे हंसवाहिनी ज्ञानदायिनी

अम्ब विमल मति दे। अम्ब विमल मति दे॥